मर्दानगी के मायने.

“मर्द बन!”

बचपन से लड़कों को यह ही एक बात, आदेश की तरह बार बार बोली जाती है.

मगर इस मर्दानगी की होड़ में क्या यह संभव है की लड़के अपने निजी व्यक्तित्व खो सकते हैं?

लेकिन यह ‘मर्दानगी’ आख़िर है क्या? मर्दानगी एक सामाजिक धारणा है जिस में जो व्यक्ति पुरुष लिंग में पैदा हुए हैं उनको कुछ सामाजिक नियमों का पालन करना होगा जिसकी वजह से वो असली ‘मर्द’ कहलाएँगे. इस कारण उनसे कुछ रूढ़िवादी किस्म की उम्मीदें बन जाती हैं. इन उम्मीदों का उनके व्यवहार में बहुत अधिक प्रभाव देखा जाता है.

आइए जानते हैं कि मर्दानगी के यह किस प्रकार के व्यवहारिक प्रभाव व मनोभाव हैं. असली मर्द की क्या पहचान है?

१. एक परिवार में मर्दों की भूमिका केवल एक कमानेवाले की है.

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२. मर्द कभी रोते नहीं, ख़ासकर के किसी के सामने.

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३. मर्दों को गुस्सा बहुत आता है और उनको अपने गुस्से को दिखाने का पूरा अधिकार है.

४. एक पिता की अपने बच्चों के प्रति ज़िम्मेदारी केवल उनकी आर्थिक प्रकार से परवरिश करने की है क्यूंकी बाकी सब माँ का काम है.

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५. असली मर्द का समाज में दर्जा केवल एक रक्षक का है.

६. जहाँ शारीरिक क्षमता व शक्ति दिखाने का प्रश्न उठता है, वहाँ सिर्फ़ मर्दों का एकाधिकार है. जैसे खेल के मैदान, अखाड़ा, जिम, रक्षा सेवायें या कोई भी वाहन चलाना.

७. मर्दों की प्रव्रत्ति हिंसात्मक होती है.  

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८. चाहे सत्ता में हो या किसी दफ़्तर में, नेतृत्व की भूमिका केवल मर्द ही निभाएँगे.

९. मर्दों को बाल हमेशा छोटे रखने चाहिए और सिर्फ़ समाज में मान्य कपड़े जैसे पॅंट, शर्ट, कुर्ता, पजामा आदि ही पहनना चाहिए.

और ऐसे कई और मर्दानगी के नियम हैं हमारे समाज में.

लेकिन अगर कोई मर्द इन नियमों का अपने जीवन में पालन ना करे तो उसके अस्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इस मर्दानगी भरे समाज में औरतों का क्या दर्जा रह जाता है? अगर कोई लड़की किसी ऐसी जगह, चुनौती, काम, खेल में भाग लेती है, जो सामाजिक रूप से केवल मर्दाना मानी जाती है – क्या वो इस मर्दानगी के दायरे में घुस रही है या वो अपने पर थोपे हुए लिंग के खिलाफ जा रही है? क्या कोई क्षेत्र केवल पुरुष विशिष्ट है?

इन कठोर मायनो में औरतों के लिए भी अलग नियम कायम हैं. क्या कोई मर्द अपने पर थोपे हुए नीयम तोड़ कर महिला विशिष्ट क्षेत्र में जा सकता है?

जैसे की आपने अभी पढ़ा, यहाँ कई सवाल उठ रहे हैं.

इसी प्रणाली में एक आख़िरी सवाल – क्या आपको लगता है की मर्दानगी के मायनों को बदलने का समय आ गया है? 

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